Friday, December 13, 2013

लैंप पोस्ट

बात तो करते हैं, हाल नहीं बताते
उनसे अच्छा तो वो नजूमी है
जो बात नहीं करता, पर हाल तो बताता है
आज ढूंढ रहा था, कम्बख्त मोहल्ला छोड़ गया

कल रात छत पे खड़ा सोच रहा था
क्या वहाँ का चाँद यहाँ से बड़ा है
तुम्हारा चेहरा ज़्यादा चमकता मालूम पड़ता था
या तो रास्ते की धूल ने धुंधला कर दिया यहाँ

लैंप पोस्ट पे नोटिस लगा था
"पेंट गीला है, कृपया हाथ ना लगाये"
सूखा तो मैं भी नहीं था
शायद नोटिस नहीं पढ़ा ठीक से

Friday, December 6, 2013

ना तुम मुस्कुराते, ना ये बात होती

ना तुम मुस्कुराते, ना ये बात होती
ना गुज़रती शाम से फरियाद होती
के थोडा ठहर ठहर के बीते लम्हा
हर लम्हे में इक दास्ताँ होती

ना शब् भर पलकें रूबरू होती
ना अफक से फ़रियाद होती
के थोड़ा ठहर ठहर के हो सवेरा
होश आने की गुंजाइश होती

ना पत्तो पे सरसराहट होती
ना पतझड़ से फ़रियाद होती
के थोड़ा ठहर के आये मौसम सरमा
 आँहें थोड़ी तो गर्म होती

ना तुम मुस्कुराते, ना ये बात होती
ना दराज़ राहों से फ़रियाद होती
के अनजान मोहोल्लो से गुज़रे रस्ता
तुम्हारे इश्क़ में डूबने की आरज़ू होती