ना तुम मुस्कुराते, ना ये बात होती
ना गुज़रती शाम से फरियाद होती
के थोडा ठहर ठहर के बीते लम्हा
हर लम्हे में इक दास्ताँ होती
ना शब् भर पलकें रूबरू होती
ना अफक से फ़रियाद होती
के थोड़ा ठहर ठहर के हो सवेरा
होश आने की गुंजाइश होती
ना पत्तो पे सरसराहट होती
ना पतझड़ से फ़रियाद होती
के थोड़ा ठहर के आये मौसम सरमा
आँहें थोड़ी तो गर्म होती
ना तुम मुस्कुराते, ना ये बात होती
ना दराज़ राहों से फ़रियाद होती
के अनजान मोहोल्लो से गुज़रे रस्ता
तुम्हारे इश्क़ में डूबने की आरज़ू होती
ना गुज़रती शाम से फरियाद होती
के थोडा ठहर ठहर के बीते लम्हा
हर लम्हे में इक दास्ताँ होती
ना शब् भर पलकें रूबरू होती
ना अफक से फ़रियाद होती
के थोड़ा ठहर ठहर के हो सवेरा
होश आने की गुंजाइश होती
ना पत्तो पे सरसराहट होती
ना पतझड़ से फ़रियाद होती
के थोड़ा ठहर के आये मौसम सरमा
आँहें थोड़ी तो गर्म होती
ना तुम मुस्कुराते, ना ये बात होती
ना दराज़ राहों से फ़रियाद होती
के अनजान मोहोल्लो से गुज़रे रस्ता
तुम्हारे इश्क़ में डूबने की आरज़ू होती
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