Thursday, October 31, 2013

ज़िन्दगी

आज उम्मीदों के पंख लगा उड़ लेने दो
         आज हक़ीक़तों से परे हूँ मैं
आज तेरा हाथ थाम कुछ दूर चल लेने दो
         आज बैसाखियों से परे हूँ मैं
आज तेरे माथे का चाँद चूम लेने दो
         आज शर्म हया से परे हूँ मैं
आज दरिया-इ-इश्क़ में डूब जाने दो
         आज मौत से परे हूँ मैं
आज बेपरवाह भावनाओ में बहने दो
        कल के हमारे सच से परे हूँ मैं
आज मजबूर दिल को मेरे होने दो
         कल कि शर्मिंदगी से परे हूँ मैं
आज तेरी चाहतो कि छाँव में दो पल गुज़ार लेने दो
          कल की निर्दयी धूप से परे हूँ मैं
आज तेरी आँखों में फना हो जाने दो
          कल की तनहा ज़िन्दगी से परे हूँ मैं 

Sunday, October 27, 2013

अलाव

दिन भर तेरी राह तकते रहे
रात भर दिन की आस करते रहे
बुझते हुए अलाव की आखरी चटखनो सा
खिड़कियाँ खोलते बंद करते रहे

Thursday, October 24, 2013

सिलवटी

कुछ इस तरह की होगी
        की गर्म कोट में लिपटी, फिर भी ठिठुरती
        की भूरी आँखों के बीच वो बिंदी अठखेलिया करती
        की चेहरे पे वो लट कभी उलझती कभी संवरती
        की मुस्कुराहटे तमाम बदमाशियां करती
        की चलती, सोचने तो थम जाती और फिर पलटती
        की भाव भंगिमाओ से सबको छलती
        की  बिखरते रेशम सी, कुछ हमवार, कुछ सिलवटी
हाँ, कुछ ऐसी ही होगी

Sunday, October 20, 2013

इत्तेफ़ाक


कुछ इत्तेफ़ाक ऐसे हो गए, 
क्या थे हम और क्या बन गए

तेरे दीदार की फिराक में, मस्जिदों के मुरीद हो गए,
तेरी बेपरवाही पे खीज कर, महफ़िलो में शरीक़ हो गए 

तू तो दिखता नहीं, तेरी परछाई के हबीब हो गए,
तेरी आरज़ू में खुद अपने रकीब हो गए

Tuesday, October 15, 2013

एक कतरा इश्क

एक कतरा इश्क था, तेरा क़र्ज़ था 
पर खामोश, खुदगर्ज़ था 

लम्हों की सुराही में तमाम कतरे बटोर लेते
कुछ को संजोते, कुछ फ़ना हो जाते

खामोश शामो में तुझे कुछ सुनाते 
हर आहट पे मुड़ के तुझे ही पाते 

खुदगर्जी नहीं, मेरे रूह की हया थी 
जो तुम देख पाते, जो तुम देख पाते

Saturday, October 5, 2013

आज शर्मिंदा हूँ

हाँ  आज शर्मिंदा हूँ मै
क्यूंकि लगा  मुझे की मैंने किया तुझे पराया 
क्यूंकि लगा मुझे की इस फूल को संवार कर न रख सका मै 
क्यूंकि इस पगली लड़की के दिल के ख्वाब कहाँ मुझसे जुदा थे 
वो तो मै ही ख्वाबो को छोड़, असलियत तराशने लगा 
ये भूल गया की इस लड़की से ही मेरे ख्वाब मेरी असलियत है 

हाँ आज शर्मिंदा हूँ मै 
क्यूंकि समझ गया हूँ, की जो मैंने पा कर खोया, वो तो लोग उम्र भर महसूस भी नहीं कर पाते 
क्यूंकि दुःख इस बात का नहीं की मै ताउम्र तनहा रहूँगा, पर इस बात का है, 
की ये पगली लड़की, अपने दिल पे दोबारा भरोसा नहीं करेगी
क्यूंकि आज मेरी आँखे नम  है इसे जाता देख, और कहीं दिल में एक टीस रह जाती है 
की अगर सच्चे दिल से कोशिश करता, तो आज मुझे मालूम होता की प्यार यही है, और कुछ नहीं 

हाँ एक बात के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ,
की तूने मुझे वो दिखाया जो शायद होता ही न था 
की तूने मुझे ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत लम्हे दिए 
और दिया  एक लक्ष्य, की पाना है मुझे भी ज़िन्दगी में वो जो मेरा है 
हाँ आबाद रहता अगर तू मेरी होती, पर तेरा दिल शायद मेरा न था 
नहीं तो मुझे आज यूँ शर्मिंदा न  होना पडता