आज उम्मीदों के पंख लगा उड़ लेने दो
आज हक़ीक़तों से परे हूँ मैं
आज तेरा हाथ थाम कुछ दूर चल लेने दो
आज बैसाखियों से परे हूँ मैं
आज तेरे माथे का चाँद चूम लेने दो
आज शर्म हया से परे हूँ मैं
आज दरिया-इ-इश्क़ में डूब जाने दो
आज मौत से परे हूँ मैं
आज बेपरवाह भावनाओ में बहने दो
कल के हमारे सच से परे हूँ मैं
आज मजबूर दिल को मेरे होने दो
कल कि शर्मिंदगी से परे हूँ मैं
आज तेरी चाहतो कि छाँव में दो पल गुज़ार लेने दो
कल की निर्दयी धूप से परे हूँ मैं
आज तेरी आँखों में फना हो जाने दो
कल की तनहा ज़िन्दगी से परे हूँ मैं
आज हक़ीक़तों से परे हूँ मैं
आज तेरा हाथ थाम कुछ दूर चल लेने दो
आज बैसाखियों से परे हूँ मैं
आज तेरे माथे का चाँद चूम लेने दो
आज शर्म हया से परे हूँ मैं
आज दरिया-इ-इश्क़ में डूब जाने दो
आज मौत से परे हूँ मैं
आज बेपरवाह भावनाओ में बहने दो
कल के हमारे सच से परे हूँ मैं
आज मजबूर दिल को मेरे होने दो
कल कि शर्मिंदगी से परे हूँ मैं
आज तेरी चाहतो कि छाँव में दो पल गुज़ार लेने दो
कल की निर्दयी धूप से परे हूँ मैं
आज तेरी आँखों में फना हो जाने दो
कल की तनहा ज़िन्दगी से परे हूँ मैं