Saturday, October 5, 2013

आज शर्मिंदा हूँ

हाँ  आज शर्मिंदा हूँ मै
क्यूंकि लगा  मुझे की मैंने किया तुझे पराया 
क्यूंकि लगा मुझे की इस फूल को संवार कर न रख सका मै 
क्यूंकि इस पगली लड़की के दिल के ख्वाब कहाँ मुझसे जुदा थे 
वो तो मै ही ख्वाबो को छोड़, असलियत तराशने लगा 
ये भूल गया की इस लड़की से ही मेरे ख्वाब मेरी असलियत है 

हाँ आज शर्मिंदा हूँ मै 
क्यूंकि समझ गया हूँ, की जो मैंने पा कर खोया, वो तो लोग उम्र भर महसूस भी नहीं कर पाते 
क्यूंकि दुःख इस बात का नहीं की मै ताउम्र तनहा रहूँगा, पर इस बात का है, 
की ये पगली लड़की, अपने दिल पे दोबारा भरोसा नहीं करेगी
क्यूंकि आज मेरी आँखे नम  है इसे जाता देख, और कहीं दिल में एक टीस रह जाती है 
की अगर सच्चे दिल से कोशिश करता, तो आज मुझे मालूम होता की प्यार यही है, और कुछ नहीं 

हाँ एक बात के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ,
की तूने मुझे वो दिखाया जो शायद होता ही न था 
की तूने मुझे ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत लम्हे दिए 
और दिया  एक लक्ष्य, की पाना है मुझे भी ज़िन्दगी में वो जो मेरा है 
हाँ आबाद रहता अगर तू मेरी होती, पर तेरा दिल शायद मेरा न था 
नहीं तो मुझे आज यूँ शर्मिंदा न  होना पडता

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