तुम चाँद के उजले हिस्से सी
कुछ दूर कुछ पास हो
दूर क्षितिज पे ढलते सूरज सी
कुछ पीली कुछ लाल हो
झरने के निनाद सी
कुछ अल्हड़ कुछ संजीदा हो
खुद अपनी हंसी सी
कुछ प्रत्यक्ष कुछ पोशीदा हो
भीगे बदन पे लगती धूप सी
कुछ ठंडी कुछ गर्म हो
सर्दी में अलाव की आग सी
कुछ कठोर कुछ नर्म हो
इस समय की स्नेहिल यादें संजोये
हर लम्हा एक नया एहसास हो
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment