Wednesday, December 29, 2010

एक लड़की

तुम चाँद के उजले हिस्से सी
कुछ दूर कुछ पास हो
दूर क्षितिज पे ढलते सूरज सी
कुछ पीली कुछ लाल हो
झरने के निनाद सी
कुछ अल्हड़ कुछ संजीदा हो
खुद अपनी हंसी सी
कुछ प्रत्यक्ष कुछ पोशीदा हो
भीगे बदन पे लगती धूप सी
कुछ ठंडी कुछ गर्म हो
सर्दी में अलाव की आग सी
कुछ कठोर कुछ नर्म हो
इस समय की स्नेहिल यादें संजोये
हर लम्हा एक नया एहसास हो

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