आज शाम भी अकेला हूँ
एक नया रास्ता देखा था कल रात
सोचता हूँ देख आऊं उस पार क्या है
शायद कोई परछाई जानी पहचानी मिल जाये
चेहरे तो सभी अनजाने हैं
पिछले साल या शायद उससे भी पहले
तुम्हारी याद तो आती थी
पर अब हर शाम नम तो है मगर
एक तीस के अलावा कुछ नहीं
तुम्हे पहचान तो लूँगा
चेहरे क्या बहुत बदलते हैं ?
लेकिन उन झुर्रियों के पीछे वो हंसी
मुमकिन है पहले जैसी न हो
यूँ होता तो कैसा होता
मै कहता और तुम सुनती
कुछ पल तो साथ चलते
और उम्र गुज़र जाती
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1 comment:
good one dude
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